
श्रीराम कथा में राम वनवास प्रसंग का हृदयस्पर्शी वर्णन, त्याग, मर्यादा और धर्म का दिया अमर संदेश
संवाददाता प्रभाकर मिश्र
बरेली। श्री हरिमंदिर, मांडल टाउन, बरेली में आयोजित सात दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के क्रम में राम वनवास प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के इस प्रसंग ने पूरे पंडाल को करुणा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को सुनकर भावविभोर हो उठे। हरिद्वार से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी डाॅ उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार अयोध्या में राजतिलक की भव्य तैयारियों के बीच माता कैकेयी के दो वरदानों के कारण भगवान श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास स्वीकार करना पड़ा। महाराज जी ने कहा कि श्रीराम ने सत्ता, वैभव और सुख-सुविधाओं को त्यागकर पिता की आज्ञा को सर्वोपरि माना और बिना किसी विरोध या शोक के वनगमन के लिए तैयार हो गए। यही मर्यादा, आज भी समाज के लिए सबसे बड़ा आदर्श है।कथा में महाराज जी ने उस करुण क्षण का भी वर्णन किया, जब माता कौशल्या शोकाकुल हो उठीं, अयोध्या नगरी शोक में डूब गई और पूरा राजमहल सूना हो गया। वहीं दूसरी ओर भगवान श्रीराम के साथ माता सीता और भ्राता लक्ष्मण ने भी वनवास का कठिन मार्ग अपनाया। महाराज जी ने बताया कि यह प्रसंग केवल वनवास नहीं, बल्कि त्याग, संयम और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है।

स्वामी डाॅ उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि राम वनवास से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, धर्म और सत्य के मार्ग से कभी विचलित नहीं होना चाहिए। उन्होंने अहंकार, लोभ और मोह त्यागकर सेवा, संयम और सदाचार को अपनाने का संदेश दिया। संगीतमयी भजनों और मार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा।
इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान पी. पी. सिंह,मालती सिंह, मोहित सिंह सहित संतोष, विपिन सिंह, सतीश, राकेश अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, संजय अग्रवाल, डॉ. रवि शरण सिंह, अशोक गुप्ता, अशोक गोयल,गिरधर गोपाल जी,राजेश सेठ हरिबाबू,इन्द्र प्रकाश सिंह,एवं राकेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने विधिवत पूजन-अर्चन कर कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया।कथा स्थल पर भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा।आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। राम वनवास प्रसंग के साथ श्रीराम कथा का यह दिन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। सात दिवसीय श्रीराम कथा का यह क्रम आगामी दिनों में भी निरंतर जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की अमृतधारा का लाभ मिलेगा।
